धनबाद। बाघमारा प्रखंड के अंगारपथरा सोनारडीह और भागाबांध में भू-धंसान प्रभावित क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि खनन प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों के लिए बनाए जा रहे इन केंद्रों के लिए स्थल का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया।
बताया जा रहा है कि इन स्थानों पर DMFT (District Mineral Foundation Trust) फंड से आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। DMFT का उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के हित में विकास एवं कल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा देना है। धनबाद जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी DMFT को जिले की प्रमुख प्रशासनिक सेवाओं और योजनाओं में शामिल किया गया है।
संवेदनशील क्षेत्र में निर्माण पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित स्थल वास्तव में भू-धंसान की दृष्टि से संवेदनशील हैं, तो निर्माण से पहले जमीन की सुरक्षा, भू-तकनीकी स्थिति और भविष्य के जोखिम का आकलन किया जाना चाहिए था।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जमीन का चयन किस विभाग या एजेंसी की अनुशंसा पर हुआ और निर्माण से पहले सुरक्षा संबंधी जांच कराई गई थी या नहीं? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग, कार्यकारी एजेंसी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से मिलना जरूरी है।
DMFT फंड के इस्तेमाल पर पहले भी उठ चुकी हैं आपत्तियां
DMFT फंड के इस्तेमाल को लेकर धनबाद में पहले भी ऑडिट संबंधी सवाल सामने आ चुके हैं। CAG की रिपोर्ट में 2016-21 के दौरान धनबाद में DMFT से जुड़े 103 चयनित कार्यों पर ₹1,136.09 करोड़ खर्च का उल्लेख है। ऑडिट में यह भी पाया गया कि संबंधित अवधि में खनन गतिविधियों से सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित लोगों अथवा क्षेत्रों की पहचान नहीं की गई थी।
CAG ने DMFT से जुड़े कार्यों में योजना चयन, प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और लाभार्थियों तक योजनाओं के प्रभावी लाभ पहुंचने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना है।
‘जिम्मेदार कौन?’ का जवाब जरूरी
अंगारपथरा सोनारडीह और भागाबांध में निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर अब सवाल उठ रहा है कि स्थल चयन और निर्माण प्रक्रिया में विभाग, संबंधित एजेंसी, बाल विकास परियोजना कार्यालय (CDPO), स्थानीय प्रशासन या खनन क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
यदि निर्माण स्थल भू-धंसान के लिहाज से सुरक्षित है तो प्रशासन को तकनीकी रिपोर्ट और सुरक्षा मानकों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, यदि क्षेत्र जोखिम वाला है तो निर्माण की स्वीकृति और स्थल चयन की प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता होगी।
बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण
आंगनबाड़ी केंद्र छोटे बच्चों और महिलाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी व्यवस्था का हिस्सा हैं। ऐसे में किसी भी केंद्र के निर्माण के लिए सुरक्षित और जोखिम-मुक्त स्थल का चयन प्राथमिकता होना चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग पूरे मामले की स्थल जांच कराए और यह सार्वजनिक करे कि इन केंद्रों के निर्माण से पहले कौन-कौन से तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों की जांच की गई थी।
अब सवाल सिर्फ DMFT की राशि खर्च होने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि खनन प्रभावित क्षेत्र के विकास के लिए मिली राशि से बना परिसंपत्ति स्वयं लोगों के लिए जोखिम का कारण न बन जाए।




















