धनबाद। कतरास कोयलांचल में लगातार सामने आ रही भू-धंसान और जमीन में गोफ बनने की घटनाओं ने एक बार फिर अवैध कोयला खनन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छाताबाद, चैतुडीह, लकड़का सहित आसपास के इलाकों में हाल के महीनों में जमीन धंसने, घरों में दरार पड़ने और लोगों के प्रभावित होने की घटनाएं सामने आई हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन इलाकों में लंबे समय से चल रहे कथित अवैध कोयला उत्खनन के पीछे आखिर कौन लोग और कौन सा नेटवर्क सक्रिय रहा है? कोयले के अवैध उत्खनन से जुड़े आरोपों की जांच और जिम्मेदारी तय करना अब स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगों में शामिल है।
जमीन धंस रही, सवालों के घेरे में व्यवस्था
छाताबाद में अगस्त में भू-धंसान की एक बड़ी घटना में एक दर्जन से अधिक मकान प्रभावित हुए थे और कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद सितंबर में भी छाताबाद क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं सामने आईं, जिससे प्रभावित परिवारों में भय का माहौल बना हुआ है।
चैतुडीह क्षेत्र में भी अगस्त के अंत में जमीन धंसने से करीब 30 फीट गहरा गोफ बन गया था। इस घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत फैल गई थी। वहीं, सितंबर में कतरास के केशलपुर क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसने की घटना में दो लोगों की मौत की खबर सामने आई।
‘कोयला किसने निकाला और कीमत कौन चुका रहा?’
इन घटनाओं के बीच स्थानीय स्तर पर यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि अवैध खनन हुआ, तो उसे लंबे समय तक रोकने की जिम्मेदारी किन एजेंसियों की थी और कार्रवाई क्यों प्रभावी नहीं हो सकी। हालांकि, किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था को अवैध खनन में संलिप्त बताने के लिए ठोस साक्ष्य और आधिकारिक जांच जरूरी है। ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष के बाद ही हो सकती है।
केंद्र सरकार ने भी जुलाई 2026 में धनबाद समेत कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन और कोयला चोरी की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। इसके बाद सीआईएसएफ को अवैध खनन, चोरी, अवैध भंडारण और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए थे।
अब मुद्दा सिर्फ कोयले का नहीं
कतरास कोयलांचल में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने सवाल को सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं रखा है। जमीन, घर, सुरक्षा और लोगों के भविष्य का सवाल भी इससे जुड़ गया है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए, अवैध खनन के मामलों की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
आखिर कोयला किसने निकाला, किसने कमाया और इसकी कीमत कौन चुका रहा है? इन सवालों के जवाब अब जांच और कार्रवाई के जरिए सामने आने चाहिए। कतरास, छाताबाद, चैतुडीह और लकड़का में लगातार हो रही घटनाओं के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है।




















