संपादकीय लेख
रामसर की पहचान, लेकिन पहुंच की राह बदहाल
साहिबगंज जिले के राजमहल प्रखंड में स्थित ब्रह्मा जमालपुर यानी बरहेल झील केवल स्थानीय जलाशय नहीं है। यह उधवा झील पक्षी अभयारण्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। झारखंड वन विभाग के अनुसार बरहेल झील का क्षेत्रफल 410 हेक्टेयर है, जबकि पातौरा झील का क्षेत्रफल 155 हेक्टेयर है। वर्ष 1991 में उधवा झील पक्षी अभयारण्य अधिसूचित हुआ और वर्ष 2025 में इसे Ramsar Site No. 2559 के रूप में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि का दर्जा मिला।

लेकिन सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर पहुंच की व्यवस्था कितनी मजबूत हुई?
बरहेल झील के आसपास कृषि भूमि है ऐसे क्षेत्र में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि किसानों की कृषि गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी आवश्यकता है।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरें एक गंभीर समस्या की ओर संकेत करती हैं। झील की ओर जाने वाला मार्ग कई जगह कच्चा और खराब स्थिति में है। बरसात और जलभराव के दौरान स्थिति और कठिन हो जाती है। किसानों को कृषि भूमि तक ट्रैक्टर और अन्य साधन पहुंचाने में परेशानी होती है। दूसरी ओर, झील देखने आने वाले पर्यटकों के लिए भी सुरक्षित और सुगम पहुंच का अभाव दिखाई देता है। जलभराव के बीच फॉरेस्ट वॉच टावर तक पानी पहुंच की स्थिति भी चिंता पैदा करती है।

यहां विकास और पर्यावरण को आमने-सामने खड़ा करने की जरूरत नहीं है। सही योजना के साथ दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर चला जा सकता है। सड़क का निर्माण ऐसा हो जो जलप्रवाह को बाधित न करे, आर्द्रभूमि के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान न पहुंचाए और किसानों तथा पर्यटकों दोनों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो।
साथ ही, बरहेल झील को ध्यान में रखते हुए पर्यटन सुविधा, सूचना पट्ट, सुरक्षित पैदल मार्ग, उचित पहुंच मार्ग और वॉच टावर की सुरक्षा जैसी सुविधाओं की समग्र योजना बनाई जा सकती है। यह काम वन विभाग, जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग, ग्रामीण विकास/सड़क से जुड़े विभाग के समन्वय से किया जा सकता है।
Ramsar का दर्जा केवल सम्मान का प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि संरक्षण की जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।
उधवा की आर्द्रभूमि प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आवास है। इसलिए मुद्दा किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध का नहीं है। सवाल यह है कि जिस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल चुकी है, वहां स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए बुनियादी पहुंच की व्यवस्था कब सुधरेगी?
इस समस्या को शिकायत के रूप में नहीं, बल्कि विकास, कृषि, पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संयुक्त जनहित के विषय के रूप में देखना चाहिए।
— संपादकीय टिप्पणी | नवसंदेश दृष्टि





















