- Advertisement -
Home धनबाद डिजिटल इंडिया में आदिम युग,बूंद-बूंद पानी को तरसता टोपाटांड

डिजिटल इंडिया में आदिम युग,बूंद-बूंद पानी को तरसता टोपाटांड

- Advertisement -

नहर के गड्ढे (चुवां) का पानी बुझाता है इंसानों की प्यास

निरसा/धनबाद: कहने को तो हम 21वीं सदी के ‘डिजिटल इंडिया’ में जी रहे हैं, जहां विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन आज हम आपको विकास की एक ऐसी खौफनाक और शर्मनाक तस्वीर दिखाने जा रहे हैं, जिसे देखकर आपकी रूह कांप जाएगी।
यह हकीकत है निरसा प्रखंड के खुशरी पंचायत अंतर्गत टोपाटांड गांव की। इस गांव के लोगों की किस्मत में शायद पीने का पानी लिखा ही नहीं है पूरे गांव में पीने के पानी के लिए न तो कोई जलाशय है, न कोई सरकारी जलमीनार,यहां प्यास बुझाना किसी जंग को जीतने जैसा है

जरा गौर से देखिए इन तस्वीरों को। भीषण गर्मी में जब गांव के पास से बहने वाली नहर सूख जाती है, तो ये ग्रामीण इसी सूखी नहर की छाती को चीरकर ‘चुवां’ (छोटा सा गड्ढा) खोदते हैं। बूंद-बूंद रिस कर जमा होने वाले इस पानी को पीने के लिए ये ग्रामीण मजबूर हैं उस पानी से ये ग्रामीण अपनी और अपने मासूम बच्चों की प्यास बुझा रहे हैं। जब बरसात आती है तब मुसीबत कम नहीं होती। तब इसी नहर में बहने वाले गंदे और प्रदूषित पानी को पीकर इन्हें जीना पड़ता है। बीमारियों का खतरा हर वक्त सिर पर मंडराता है, लेकिन करें तो क्या करें? हलक सुखाने से बेहतर ये पानी पीना ही इनकी मजबूरी बन चुकी है।”

ग्रामीणों ने मीडिया के सामने अपना ये सदियों पुराना दर्द बयां किया है। आंखों में आंसू और दिल में सिस्टम के खिलाफ आक्रोश साफ देखा जा सकता है।  लेकिन सबसे बड़ा और दुर्भाग्यपूर्ण सवाल यह है कि हमारे जनप्रतिनिधि आखिर सोए क्यों हैं? वोट के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता आज इन मासूम ग्रामीणों को इस नारकीय जीवन में तड़पने के लिए अकेला छोड़ चुके हैं। आखिर क्या वजह है कि आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस गंभीर समस्या से ग्रामीणों को निजात दिलाने की जहमत नहीं उठाई?

यह बेरुखी क्यों? इसका जवाब तो सिर्फ और सिर्फ वो सफेदपोश जनप्रतिनिधि ही दे सकते हैं

संविधान लोगो को जीने का अधिकार देता है और पानी जीवन की सबसे मूलभूत जरूरत है। टोपाटांड के ग्रामीणों ने अब मीडिया के माध्यम से सूबे की सरकार से गुहार लगाई है। देखना यह है कि हुक्मरानों की नींद कब टूटती है। क्या इन ग्रामीणों को कभी उनके हक का पानी मिल पाएगा, या फिर ये इसी तरह चुवां का पानी पीकर गुजर बसर करने को मजबूर रहेंगे?

- Advertisement -
- Advertisement -
Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read

मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों की हत्या: हम बर्दास्त नही करेंगें : संतोष सिंह

निरसा|धनबाद:  एग्यारकुंड प्रखंड कांग्रेस कमेटी द्वारा रविवार को मुगमा डाक बंगला परिसर में भव्य 'कार्यकर्ता सम्मेलन एवं संवाद सह प्रशिक्षण शिविर' का आयोजन किया...
- Advertisement -

सिनीडीह में मनाया गया शहीद गोपाल बाउरी का शहादत दिवस ।

महुदा । मधुबन थाना क्षेत्र सिनीडीह शाहिद गोपाल बाउरी का शहादत दिवस बाघमारा प्रखंड अंतर्गत सिनीडीह में अखिल भारतीय बाउरी समाज कल्याण समिति के...

झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व केंद्रीय महासचिव अवध किशोर सहाय का निधन ।

धनबाद / झारखंड : धनबाद में श्रमिक आंदोलन और समाज सेवा की एक मजबूत कड़ी टूट गई। अवध किशोर सहाय का निधन हो गया...

दो दिवसीय पंडित दिनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान का समापन ।

गोपिनाथडीह / पुटकी । गोपिनाथडीह बस्ती के सामुदायिक भवन में भाजपा धनबाद प्रखण्ड अध्यक्ष गौतम सिंह चौधरी के अध्यक्षता में दो दिवसीय पंडित दिन...
Related News

मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों की हत्या: हम बर्दास्त नही करेंगें : संतोष सिंह

निरसा|धनबाद:  एग्यारकुंड प्रखंड कांग्रेस कमेटी द्वारा रविवार को मुगमा डाक बंगला परिसर में भव्य 'कार्यकर्ता सम्मेलन एवं संवाद सह प्रशिक्षण शिविर' का आयोजन किया...

सिनीडीह में मनाया गया शहीद गोपाल बाउरी का शहादत दिवस ।

महुदा । मधुबन थाना क्षेत्र सिनीडीह शाहिद गोपाल बाउरी का शहादत दिवस बाघमारा प्रखंड अंतर्गत सिनीडीह में अखिल भारतीय बाउरी समाज कल्याण समिति के...

झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व केंद्रीय महासचिव अवध किशोर सहाय का निधन ।

धनबाद / झारखंड : धनबाद में श्रमिक आंदोलन और समाज सेवा की एक मजबूत कड़ी टूट गई। अवध किशोर सहाय का निधन हो गया...

दो दिवसीय पंडित दिनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान का समापन ।

गोपिनाथडीह / पुटकी । गोपिनाथडीह बस्ती के सामुदायिक भवन में भाजपा धनबाद प्रखण्ड अध्यक्ष गौतम सिंह चौधरी के अध्यक्षता में दो दिवसीय पंडित दिन...

डिजिटल इंडिया में आदिम युग,बूंद-बूंद पानी को तरसता टोपाटांड

नहर के गड्ढे (चुवां) का पानी बुझाता है इंसानों की प्यास निरसा/धनबाद: कहने को तो हम 21वीं सदी के 'डिजिटल इंडिया' में जी रहे हैं,...
- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here