जंतर-मंतर आंदोलन पर सरकार को घेरा, प्रधानमंत्री से पूछा- क्या लोकतांत्रिक आवाज उठाने वालों पर लाठी-गोली ही जवाब है?
प्रकाशित तिथि: 23/07/2026 |
संवाददाता: मनोज कुमार
गोड्डा। जुल्मी जब-जब जुल्म करेगा, सत्ता के गलियारों से, चप्पा-चप्पा गूंज उठेगा, इंकलाब के नारों से।” इन नारों के साथ सामाजिक कार्यकर्ता अनंत झा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं, युवक-युवतियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं को देश का चौकीदार, धर्म रक्षक, हिंदुत्व रक्षक और मंदिर रक्षक बताते हैं। ऐसे में देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते वह प्रधानमंत्री से जानना चाहते हैं कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग क्यों किया गया।अनंत झा ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उन आंदोलनकारियों में धर्म, हिंदुत्व और मंदिर के समर्थकों के बच्चे शामिल नहीं थे? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों पर विचार करना चाहिए, न कि उनके खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।उन्होंने वर्ष 1974 से 1977 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में भी छात्र-छात्राओं, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया गया था। इसका परिणाम 1977 के चुनाव में देखने को मिला, जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अनंत झा ने कहा कि इतिहास से सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि यदि लोकतांत्रिक आवाजों को इसी तरह दबाने का प्रयास जारी रहा, तो वर्ष 2029 में वर्तमान सरकार को भी जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ सकता है। अंत में उन्होंने कहा—“जय हिंद, जय भारत, जय संविधान।”
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