महागामा / प्रतिनिधि : अनुमंडल इन दिनों डायरिया के गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है। गांव-गांव और मोहल्लों में तेजी से फैल रही इस बीमारी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर निजी क्लीनिकों तक मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में डायरिया के मामलों में अचानक वृद्धि हुई है। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इस बीमारी की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। कई परिवारों में एक साथ दो से तीन सदस्य बीमार पड़ने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है।इस बढ़ते प्रकोप के पीछे दूषित पेयजल और गंदगी को मुख्य कारण माना जा रहा है। कई जगहों पर जलापूर्ति पाइपलाइन लीक है, जबकि पोखरों और हैंडपंपों के आसपास सफाई का अभाव है। इससे पानी संक्रमित हो रहा है और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से न तो नियमित ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जा रहा है और न ही जल स्रोतों की साफ-सफाई पर ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता भी अपेक्षा के अनुरूप नजर नहीं आ रही है, जिस पर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सतर्कता नहीं बरती गई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने लोगों से केवल उबला या शुद्ध पानी पीने, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने और लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराने की अपील की है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बढ़ते संकट को गंभीरता से लेते हुए त्वरित और ठोस कदम उठाएगा, या फिर हालात और बिगड़ने का इंतजार किया जाएगा। फिलहाल महागामा की जनता राहत के इंतजार में है।

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