(विलंब से पहुंचे डॉक्टरों की खुली पोल)
साहिबगंज। झारखंड प्रतिनिधि: सदर अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही और मनमानी के खिलाफ अब सख्ती शुरू हो गई है। ताकि ओपीडी और चिकित्सा सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए सख्ती तेज कर दी गई है। इसी क्रम में शनिवार को सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान सुबह ठीक 9 बजे ओपीडी पहुंच गए, जहां पहले से दर्जनों मरीज डॉक्टरों का इंतजार कर रहे थे।लेकिन ओपीडी खाली देखकर सीएस काफी नाराज हो गए।करीब साढ़े नौ बजे महिला डॉक्टर डॉ. जूही अस्पताल पहुंचीं, जबकि अन्य डॉक्टर भी धीरे-धीरे पहुंचे।

हैरानी की बात तब हुई जब ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉक्टर डॉ. सचिन कुमार साढ़े दस बजे अस्पताल पहुंचे। इस दौरान मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, कई मरीज बिना इलाज के ही वापस लौट गए।स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन ने सभी डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाई और सख्त निर्देश दिया कि समय पर ड्यूटी करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही से सरकार की छवि धूमिल हो रही है और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
पत्रकार एवं ओटी असिस्टेंट मामले में भी डॉक्टर सचिन को लगाया फटकार…..
डॉ. सचिन कुमार द्वारा मीडिया में खबर प्रकाशित होने पर आपत्ति जताने पर सिविल सर्जन और भी नाराज हो गए। उन्होंने साफ कहा कि जनता के सामने सच्चाई रखना पत्रकारों का अधिकार है और किसी को भी खबर प्रकाशित करने से रोका नहीं जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि समय पर ड्यूटी नहीं करने की जिम्मेदारी कौन लेगा?
ओटी असिस्टेंट मामले में भी फटकार
सिविल सर्जन ने ओटी असिस्टेंट के साथ दुर्व्यवहार के मामले में भी डॉ. सचिन कुमार को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि सिर्फ पत्रकार ही नहीं, बल्कि अस्पताल कर्मियों के साथ भी गलत व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए सीएस ने गंभीरता जताई और डॉ. सचिन को अपने चेंबर में तलब किया।
अब रोजाना करेंगे निगरानी…..
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि अब वे खुद रोजाना सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक अस्पताल में मौजूद रहेंगे और सभी व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके। या कहे फिर यह कदम सीएस द्वारा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करने और निजी अस्पतालों की तरह सरकारी अस्पतालों को भी सुरक्षित व सुव्यवस्थित बनाने के लिए उठाए जा रहे हैं।























