नई दिल्ली | एजेंसी:
भारत की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।
Ministry of Ports Shipping and Waterways ने Korea International Cooperation Agency (कोइका) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है।
यह समझौता 2 अप्रैल 2026 को हुआ।
यह पहल ‘समुद्री अमृत काल विजन 2047’ के तहत शुरू की गई है।
इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शिपबिल्डिंग हब बनाना है। इसके साथ ही शिपबिल्डिंग और मरीन सेक्टर में कुशल मानव संसाधन तैयार किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया।
उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत की समुद्री यात्रा में नया मोड़ लाएगी। इसके जरिए एक तकनीकी रूप से सक्षम और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत कार्यबल की मैपिंग की जाएगी।
साथ ही कौशल अंतर (Skill Gap) का मूल्यांकन भी होगा।
इसके बाद एक मजबूत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।
इसके अलावा भारत और दक्षिण कोरिया में संयुक्त कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
इनमें उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शिक्षाविद भाग लेंगे।
इससे अनुभवों का आदान-प्रदान संभव होगा।
वहीं दोनों देशों के बीच एक बड़े सेंटर की स्थापना पर भी काम चल रहा है। इसका नाम ‘शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर’ होगा।
यह केंद्र युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण देगा।
इसके परिणामस्वरूप रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कुल मिलाकर, यह पहल भारत के समुद्री क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह देश को आत्मनिर्भर, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।























