डॉ. रणजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में शोध और जागरूकता को नई दिशा
राजमहल / साहिबगंज | संवाददाता : राजमहल की ऐतिहासिक पहाड़ियाँ एक बार फिर वैज्ञानिक गतिविधियों और शोध कार्यों का केंद्र बनती जा रही हैं। विशेष रूप से मांडरो फॉसिल्स पार्क (Fossils Park Mandro) में जीवाश्मों के संरक्षण, सुरक्षा और वैज्ञानिक अध्ययन को लेकर उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं। इस दिशा में मॉडल कॉलेज राजमहल, साहिबगंज के प्राचार्य सह प्रख्यात भू-विज्ञानी डॉ. रणजीत कुमार सिंह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रही है।
डॉ. सिंह के सतत प्रयासों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण मांडरो क्षेत्र के जीवाश्म न केवल संरक्षित हो रहे हैं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध का विषय भी बनते जा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के फैकल्टी, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी राजमहल पहाड़ियों का भ्रमण कर यहाँ के समृद्ध भू-वैज्ञानिक इतिहास को समझ रहे हैं।

डॉ. रणजीत कुमार सिंह द्वारा आयोजित शैक्षणिक भ्रमण और फील्ड स्टडी कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिभागियों को राजमहल ट्रैप, जुरासिक काल के जीवाश्म, डायनासोर युग की भू-वैज्ञानिक घटनाओं तथा क्षेत्र की विशिष्ट चट्टानी संरचनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाती है। वे सरल और वैज्ञानिक भाषा में जटिल भू-वैज्ञानिक तथ्यों को समझाकर विद्यार्थियों में अनुसंधान के प्रति रुचि उत्पन्न करते हैं।
उनके नेतृत्व में मांडरो फॉसिल्स पार्क में जीवाश्मों के संरक्षण हेतु जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय समुदाय भी इस धरोहर के महत्व को समझे और इसके संरक्षण में भागीदार बने। डॉ. सिंह का मानना है कि “जीवाश्म केवल पत्थर नहीं, बल्कि पृथ्वी के करोड़ों वर्षों के इतिहास का जीवंत दस्तावेज हैं।”

उल्लेखनीय है कि डॉ रणजीत के उत्कृष्ट योगदान ,सहयोग भू-विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उन्हें कल देर शाम धर्मशाला में
पटना विश्वविद्यालय पटना भू विज्ञान विभाग, बिहार के स्वर्ण जयंती वर्ष पर स्मृति चिन्ह और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया , जो उनके कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता को दर्शाता है।
देश-विदेश के शिक्षाविदों ने भी डॉ. सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राजमहल क्षेत्र में इस प्रकार का समर्पित कार्य भू-विज्ञान के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। उनके मार्गदर्शन में हो रहे शोध कार्य भविष्य में नए वैज्ञानिक तथ्यों और खोजों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
निस्संदेह, डॉ. रणजीत कुमार सिंह के नेतृत्व में राजमहल की पहाड़ियाँ न केवल अतीत के रहस्यों को उजागर कर रही हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए वैज्ञानिक ज्ञान का सशक्त आधार भी बन रही हैं।






















