नई दिल्ली/अंतरराष्ट्रीय डेस्क | संवाददाता
दुनिया तेजी से कचरे के ऐसे संकट की ओर बढ़ रही है, जो आने वाले दशकों में पर्यावरण, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।
विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2022 में वैश्विक स्तर पर करीब 2.6 अरब टन कचरा उत्पन्न हुआ, जो वर्ष 2050 तक बढ़कर लगभग 3.9 अरब टन तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार कचरे के बढ़ते स्तर का सीधा असर पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अनियंत्रित कचरा प्रबंधन के कारण कई देशों में वायु, जल और भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।
वहीं, यूएनईपी की ‘फूड वेस्ट इंडेक्स’ रिपोर्ट में बताया गया है कि हर साल करीब 1 अरब टन भोजन बर्बाद हो रहा है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा केवल घरेलू स्तर से आता है। यह स्थिति खाद्य सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते कचरा प्रबंधन, रिसाइक्लिंग और जागरूकता पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गहरा सकता है।




